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Hindi Moral Stories

Nov 24, 2020, 11:02 AM #1
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Short Hindi Stories with Moral
Thanked by: Sujit_007
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Nov 24, 2020, 11:03 AM #2
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एक बार एक स्कूल था जहा हर रोज प्रार्थना होती थी। जो कोई भी छात्र प्रार्थना में नहीं जाता था उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाती थी।

उसी स्कूल में एक छात्र का नाम था धीरज। धीरज पढाई-लिखाई में, साफ़-सफाई में बहुत ही आगे था और कक्षा के कुछ छात्र धीरज से जलते भी थे।

एक दिन धीरज प्रार्थना में नहीं जा पाया। टीचर कक्षा में आये और आकर पूछा –

आज कक्षा में कोन उपस्थित नहीं था?

कुछ बच्चो ने बताया कि धीरज आज प्रार्थना में नहीं आया था और उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाये। इस पर टीचर ने धीरज को खड़ा किया और उसको बोला कि धीरज तुम्हे प्रार्थना में नहीं आने पर सजा दी जाएगी लेकिन उस से पहले तुम्हारे प्रार्थना में ना आने का कारण जानना चाहता हूँ।

इस पर धीरज ने कहा –

सर जी, मैं प्रार्थना में आने ही वाला था लेकिन जब मैं कक्षा से निकलने ही वाला था तो मैंने देखा की कक्षा में कचरा फैला हुआ है और बिलकुल भी साफ़-सफाई नहीं की गई है इसलिए मैं साफ़-सफाई में व्यस्त हो गया।

धीरज ने आगे कहा – सर जी, आप ही तो कहते है कि स्वच्छता ही भगवान है। बस यही कारण है मैं प्रार्थना में उपस्थित नहीं हो पाया।

टीचर को धीरज की बातें सुनकर बहुत गर्व हुआ और टीचर ने धीरज को गले लगा लिया।
Thanked by: Sujit_007
Nov 24, 2020, 11:05 AM #3
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बिना पूँछ की लोमड़ी

शिकारियों के हमले से एक लोमड़ी की जान तो बच गई लेकिन उसकी पूँछ कट गई। उसे बहुत शर्म आ रही थी।

अपनी शर्म छिपाने के लिए उसने सारी लोमड़ियों की सभा बुलाई और बोली, “मेरे साथियो, मेरे ऊपर ईश्वर ने विशेष कृपा की है और मेरी पूँछ हटा दी है।
अब मैं सुखी और आरामदायक जीवन जी सकता हूँ। हमारी पूछें तो कुरूप और बोझ जैसी हैं। हैरानी की बात है कि हमने अब तक अपनी पूँछों को काटा क्यों नहीं! मेरी सलाह मानो और सब लोग अपनी-अपनी पूँछे काट डालो।’ “

एक चालाक लोमड़ी उठ खड़ी हुई और हँसते हुए बोली, “अगर मेरी पूँछ भी कट गई होती, तब तो मैं तुम्हारी बात का समर्थन कर देती।

लेकिन मेरी पूँछ तो सकुशल है तो मैं या बाकी लोमड़ियाँ अपनी-अपनी पूँछ क्यों काटें? तुम अपनी स्वार्थी सलाह अपने पास ही रखो।”
Nov 24, 2020, 11:07 AM #4
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उद्दंड बेटा

एक व्यापारी का बहुत उद्दंड बेटा था। वह पूजा-पाठ और भलाई के कामों में बिलकुल रुचि नहीं लेता था।

धर्म-कर्म में उसकी रुचि जगाने के इरादे से उसकी माँ ने उसे एक मंदिर में संत के प्रवचन सुनने के लिए भेजा।

उसकी माँ ने उसे लालच दिया कि अगर वह संत के पूरे प्रवचन सुनकर आएगा तो वह उसे हजार रुपए देगी।
रुपयों के लालच में बेटा तैयार हो गया, लेकिन ध्यान से प्रवचन सुनने के बजाय वह वहाँ पूरे समय सोता रहा।

अगले दिन सुबह, उसका बेटा घर लौटा और उसने माँ से हजार रुपए ले लिए। रुपए लेकर उसने व्यापार के लिए समुद्र पार जाने का निश्चय किया।

उसकी माँ ने उसे रोकने का बहुत प्रयास किया, लेकिन बेटे ने उसकी एक नहीं सुनी। उसने अपना सामान बाँधा और यात्रा पर निकल पड़ा।

मगर अफसोस! रास्ते में बहुत तेज तूफान आया और उसका जहाज सारे यात्रियों समेत डूब गया।
इस प्रकार माँ की सलाह न मानने की सजा बेटे को भी भुगतनी पड़ी।
Thanked by: Sonu
Nov 24, 2020, 11:09 AM #5
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नीमहकीम मेंढक

बहुत समय पहले, एक मेंढक था, जो अधिकतर समय कीचड़ से भरे दलदल में घुसा रहता था। उसे यह भ्रम हो गया कि वह हर किसी का इलाज कर सकता है।

एक दिन वह दलदल से निकला और दावा करने लगा कि उसने धरती की सारी बीमारियाँ ठीक कर दी हैं। “अरे साथियो, मेरे पास आओ।

मुझे चमत्कारी शक्तियाँ मिल गई हैं। मैं तुम सबकी बीमारियाँ ठीक कर सकता हूँ,” वह पूरी ताकत से चिल्लाकर बोला। पास से एक लोमड़ी निकल रही थी।
वह वहीं रुक गई और बोली, “तुम तो नीमहकीम हो। अगर तुम्हारे पास कोई चमत्कारी शक्ति है तो पहले अपनी ये लँगड़ी चाल और यह छेदों वाली खाल ही ठीक कर लो।

अपने आपको जबरदस्ती डॉक्टर कहते हो, पहले स्वयं का इलाज तो कर लो।” किसी के काम की जाँच व्यवहार से ही की जा सकती है।
Nov 24, 2020, 11:10 AM #6
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keep it up..smile
Nov 24, 2020, 11:10 AM #7
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सियारों का झुंड और हाथी

सियारों के एक झुंड ने एक हाथी को देखा। उनका मन उस हाथी का मॉस खाने का करने लगा। एक बूढ़ा सियार बोला, “चलो, मैं तुम लोगों को तरीका सुझाता हूँ। हाथी को मारने का एक तरीका है मेरे पास ।”

हाथी इधर-उधर घूम रहा था। बूढ़ा सियार उसके पास पहुँचा। “महोदय, मैं एक सियार हूँ। मैं सारे जानवरों ने मुझे आपके पास भेजा है । हम लोगों ने मिलकर तय किया है कि आपको जंगल का राजा बनाया जाना चाहिए। आपके अंदर राजा के सारे गुण हैं। कृपया मेरे साथ चलिए और राजा का काम सँभाल लीजिए।”
हाथी सियार की चापलूसी भरी बातों में आ गया। वह सियार के साथ चल पड़ा। सियार उसे एक झील के पास ले गया, जहाँ हाथी फिसल पड़ा और गहरे कीचड़ में फँस गया।

“मेरी सहायता करो मित्र,” हाथी असहाय होकर चिल्लाने लगा। सियार कुटिलता से मुस्कराया और कहने लगा, “महोदय, आपने मेरे जैसे जानवर पर विश्वास किया। अब आपको इसकी कीमत जान देकर ही चुकानी पड़ेगी।”

हाथी कीचड़ में फँसा रहा और कुछ देर में मर गया। सारे सियारों ने मिलकर उसके गोश्त की दावत उड़ाई।
Nov 24, 2020, 11:15 AM #8
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एक गाँव में एक व्यापारी रहता था। वह व्यापारी जंगल से लकड़ियाँ काटकर अपना व्यापार किया करता था। एक दिन वह जंगल में एक नदी के किनारे पेड़ पर बैठकर लड़की काट रहा था। इतने में ही ये क्या….

व्यापारी की कुल्हाड़ी उस नदी में गिर गई। व्यापारी ने देर ना करते हुए तुरंत उस नदी में छलांग लगा दी और अपनी कुल्हाड़ी को ढूँढने का बेहद प्रयास किया।

लेकिन अंत में बेचारे व्यापारी को निराशा ही मिली। उसके पास सिर्फ एक ही कुल्हाड़ी थी जिस से उसकी रोजी रोटी चलती थी। यह सोचकर अब वो नदी के किनारे बैठकर रोने लगा की अब वह क्या करेगा? कोन उसकी मदद करेगा?

इतने में नदी से गंगा देवी निकलकर व्यापारी के सामने प्रकट हो गई। गंगा देवी ने व्यापारी से पूछा तुम क्यों रो रहे हो?

व्यापारी ने गंगा देवी को सारी बात बताई। तभी गंगा देवी ने नदी में दुबकी लगाई और सोने की कुल्हाड़ी निकालकर लाई। व्यापारी को सोने की कुल्हाड़ी दिखाकर गंगा देवी ने पूछा –

गंगा देवी – क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?

व्यापारी – नहीं, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।

गंगा देवी ने फिर से नदी में दुबकी लगे और इस बार वह चांदी की कुल्हाड़ी निकालकर लाई। अब गंगा देवी ने फिर से पूछा –

गंगा देवी – क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?

व्यापारी – नहीं, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।

अब गंगा देवी ने एक बार और नदी में दुबकी लगे और इस बार लोहे की कुल्हाड़ी निकालकर लाई।

गंगा देवी – क्या यह है तुम्हारी कुल्हाड़ी?

व्यापारी – जी हाँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है।

गंगा देवी ने व्यापारी की ईमानदारी देखकर उसे तीनो कुल्हाड़ी दे दी और फिर गायब हो गई।

Moral of this Short Hindi Story – ईमानदार इंसान को हमेशा उसके किये का फल मिलता है।
Nov 24, 2020, 06:53 PM #9
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लड़ने वाले मुर्गे और बाज

कुछ समय पहले की बात है। दो मुर्गे एक कूड़े के ढेर पर लड़ रहे थे । दोनों पूरी शक्ति से एक-दूसरे पर आक्रमण कर रहे थे।
लड़ाई में जीतने वाला ही उस ढेर का राजा घोषित होने वाला था। आखिरकार एक मुर्गा बुरी तरह से घायल होकर गिर पड़ा। धीरे-धीरे उठकर वह अपने दड़बे में चला गया।

जीतने वाले मुर्गे ने एक उड़ान मारी और जोर से बाँग लगाने लगा। उसी समय एक बाज ऊपर से उड़कर जा रहा था।

बाज ने एकदम से झपट्टा मारा और उस मुर्गे को दबोचकर ले गया। हारा हुआ मुर्गा यह सब देख रहा था। वह दड़बे से बाहर निकला और कूड़े के ढेर पर खड़ा हो गया।

उसने बाँग लगाकर अपने को राजा घोषित कर दिया। घमंड करने वाले की सदैव हार होती है।
Nov 24, 2020, 06:55 PM #10
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एक बार एक राजा ने एक साँप की जान बचाई। साँप ने प्रसन्न होकर राजा को ऐसी शक्ति दी जिससे कि वह पशुओं की भाषा समझने लगा।

हालाँकि उसने इस शक्ति को गुप्त रखने की भी शर्त लगा दी और कहा कि अगर किसी को भी उसने यह बता बताई तो उसकी मृत्यु हो जाएगी।
एक बार राजा, रानी के साथ बगीचे में बैठा था। उसने एक चींटी को मिठाई के टुकड़े के बारे में बोलते सुना। राजा चींटी की बात सुनकर मुस्कराने लगा।

रानी ने उससे मुस्कराने का कारण पूछा। राजा ने रानी को बहुत समझाने की कोशिश की पर वह बार- बार कारण पूछती ही रही।

आखिरकार राजा उसे रहस्य बताने को तैयार गया। तभी आकाशवाणी सुनाई दी, “हे राजन, तुम क्यों उसके लिए अपने प्राणों का बलिदान दे रहे हो,

जो स्वयं तुम्हारे प्राणों का मूल्य नहीं समझ रही थी?” राजा ने रानी को बताया कि वह कितनी स्वार्थी है। रानी को भी अपनी गलती समझ में आ ई।
Nov 24, 2020, 06:56 PM #11
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गर्मी का दिन था। पृथ्वी पर अचानक लोगों ने खबर सुनी सूरज का कि जल्द ही विवाह होने वाला है। सारे लोग बहुत प्रसन्न हुए।

मेंढक भी बहुत प्रसन्न हुए और पानी में उछल-कूद मचाने लगे। एक बूढ़ा मेंढक पानी के ऊपर आया और सारे मेंढकों को समझाने लगा कि यह प्रसन्नता की नहीं दुख की बात है,
“मेरे साथियो! तुम लोग इतने प्रसन्न क्यों हो रहे हो? क्या यह वाकई खुशी मनाने की खबर है? एक अकेला सूरज तो अपनी गर्मी से हमें झुलसा देता है।

जरा सोचो, जब इस सूरज के दर्जन भर बच्चे हो जाएंगे तो हमारा क्या हाल होगा। हमारा कष्ट कई गुना बढ़ जाएगा और हम लोग जीवित नहीं रह पाएँगे। “
Nov 24, 2020, 06:58 PM #12
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एक दिन, गोबर में रहने वाले भँवरे की निगाह मेज पर रखी शराब की खाली बोतल पर पड़ी।

वह बोतल के पास गया और उसमें बची- खुची बूंदें पी गया जिससे उसे नशा चढ़ गया।

इसके बाद वह खुशी – खुशी गुंजन करता हुआ वापस गोबर के ढेर में चला गया। पास से ही एक हाथी गुजर रहा था।

गोबर की गंध की वजह से वह दूर हट गया और सीधा जाने लगा। नशे में चूर भँवरे को लगा कि हाथी उससे डर गया है।

उसने वहीं से भँवरे को आवाज लगाई और उसे लड़ने की चुनौतीदेने लगा।
“इधर आ, मोटे! मुझसे मुकाबला कर। देखते हैं कौन जीतता है, वह हाथी की ओर देखकर चिल्लाया।

हाथी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। नशे की धुन में भँवरा उसे लगातार चुनौती देता रहा।

आखिरकार, हाथी का धीरज खत्म हो गया। उसने गुस्से में आकर भँवरे पर गोबर और पानी फेंक दिया। भँवरे की वहीं जान निकल गई।

शराब का नशा व्यक्ति को अपने बारे में गलतफहमी पैदा कर देता है
Nov 29, 2020, 08:59 AM #13
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एक बंदर और एक मगरमच्छ आपस में दोस्त थे। मगरमच्छ की माँ को बंदर का हृदय बहुत स्वादिष्ट लगता था। उसने मगरमच्छ से कहा कि वह उसके लिए बंदर का हृदय लाए।

मगरमच्छ ने बंदर से कहा, “उस टापू के फल पक गए हैं। मैं तुम्हें वहाँ ले चलता हूँ।” बंदर के मुँह में पानी आने लगा।

वह उछलकर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया। दोनों टापू की ओर चल पड़े। रास्ते में मगरमच्छ ने बताया, “मेरी माँ तुम्हारा हृदय खाना चाहती है और मैं तुम्हें उसके पास ही लिए जा रहा हूँ।”

बंदर चुपचाप सोचने लगा। कुछ देर बाद वह बोला, “अरे, लेकिन मैं तो अपना हृदय पेड़ पर ही छोड़ आया हूँ।

तुम्हें मेरा हृदय चाहिए तो मुझे वापस वहीं ले चलो।” चतुर बंदर ने बात बनाई।

मूर्ख मगरमच्छ बंदर को वापस नदी के तट पर ले आया। जैसे ही वे तट के पास पहुंचे, बंदर उछलकर पेड़ पर चढ़ गया और उसकी जान बच गई।
Nov 29, 2020, 09:00 AM #14
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एक बार एक बहुत चालाक मुर्गी थी। एक दिन वह बीमार पड़ गई और अपने घोंसले में पड़ी थी। तभी एक बिल्ली उसे देखने आई।

उसके घोंसले में घुसकर बिल्ली बोली, “मेरी दोस्त, क्या हुआ तुम्हें? क्या मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकती हूँ?

तुम्हें कुछ चाहिए हो तो बताओ, मैं ला दूँगी। अभी तुम्हें कुछ चाहिए क्या?”

मुर्गी ने बिल्ली की प्यार भरी बातें सुनीं। उसे खतरे का आभास हो गया। वह बोली, “हाँ, बिलकुल।

मेरे लिए एक काम कर दो। यहाँ से चली जाओ। मैं बीमार हूँ और किसी अनचाहे मेहमान को बुलाकर कोई खतरा नहीं उठाना चाहती।”
Dec 04, 2020, 09:36 AM #15
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एक कुत्ते और एक खरगोश के बीच बहुत पक्की दोस्ती थी। खरगाश का स्वभाव सीधा-सादा था, जबकि कुत्ता बहुत चालाक था।

एक दिन कुत्ते ने अचानक खरगोश को पकड़कर जोर से काट लिया। खरगोश दर्द के मारे मरा जा रहा था।

अब कुत्ता खरगोश के घाव को चाट-चाटकर उसे आराम पहुँचाने की कोशिश करने लगा। खरगोश कुत्ते के व्यवहार को देखकर दंग था और समझ नहीं पा रहा था कि वो क्या करे।

वह जानने की कोशिश कर रहा था कि कुत्ता क्या चाहता है। “पहले मुझे यह बताओ, तुम मेरे दोस्त हो या दुश्मन?

अगर तुम मेरे सच्चे दोस्त हो, तो तुमने मुझे इतने जोर से काटा क्यों? अगर तुम दुश्मन हो तो अब मेरे घावों को चाट क्यों रहे हो?

या तो मुझे मार डालो या मुझे अपनी मर्जी से जीवन जीने दो।”
Dec 04, 2020, 09:36 AM #16
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तीन कुत्ते थे, जो आपस में गहरे मित्र थे। एक दिन, तीनों कुत्ते भूखे थे और उन्हें खाने-पीने को कुछ नहीं मिल रहा था।

अचानक उन्हें पानी की धारा में नीचे एक हड्डी पड़ी दिखी। उन्होंने वह हड्डी उठाने की बहुत कोशिश की लेकिन उस तक नहीं पहुंच पाए।

तीनों ने निश्चय किया कि अगर सारा पानी पी लिया जाए तो उन्हें हड्डी मिल जाएगी।

तीनों ने पानी पीना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में उनके पेट भर गए और फूलने लगे। वे तब भी नहीं रुके और लगातार पानी पीते गए।

उनके पेट और अधिक फूलते गए और फट गए। उनके पेटों से सारा पानी भी बाहर निकल पड़ा। तीनो कुत्ते उसी पानी की धारा में नीचे मरे पड़े थे।

अगर तुम मूर्खतापूर्ण तरीकों से किसी असंभव कार्य करने की कोशिश करोगे तो तुम्हें हानि होना निश्चित है।
Dec 04, 2020, 09:36 AM #17
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एक व्यापारी ने एक मंदिर बनवाना शुरू किया और मजदूरों को काम पर लगा दिया। एक दिन, जब मजदूर दोपहर में खाना खा रहे थे, तभी बंदरों का एक झुंड वहाँ आ गया।

बंदरों को जो सामान हाथ लगता, उसी से वे खेलने लगते। एक बंदर को लकड़ी का एक मोटे लट्टे में एक बड़ी-सी कील लगी दिखाई दी।

कील की वजह से लट्टे में बड़ी दरार सी बन गई थी। बंदर के मन में आया कि वह देखे कि आखिर वह है क्या।

जिज्ञासा से भरा बंदर जानना चाहता था कि वह कील क्या चीज है। बंदर ने उस कील को हिलाना शुरू कर दिया।

वह पूरी ताकत से कील को हिलाने और बाहर निकालने की कोशिश करता रहा। आखिरकार, कील तो बाहर निकल आई लेकिन लट्टे की उस दरार में बंदर का पैर फँस गया।

कील निकल जाने की वजह से वह दरार एकदम बंद हो गई। बंदर उसी में फँसा रह गया और पकड़ा गया। मजदूरों ने उसकी अच्छी पिटाई की।
Dec 04, 2020, 09:36 AM #18
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बहुत समय पहले की बात है, एक भारी किंग कोबरा एक घने जंगल में रहता था। वह रात में शिकार करता था और दिन में सोता रहता था।

धीरे-धीरे वह काफी मोटा हो गया और पेड़ के जिस बिल में वह रहता था, वह उसे छोटा पड़ने लगा। वह किसी दूसरे पेड़ की तलाश में निकल पड़ा।

आखिरकार, कोबरा ने एक बड़े पेड़ पर अपना घर बनाने का निश्चय किया, लेकिन उस पेड़ के तने के नीचे चींटियों की एक बड़ी बाँबी थी,

जिसमें बहुत सारी चींटियाँ रहती थीं। वह गुस्से में फनफनाता हुआ बाँबी के पास गया और चींटियों को डाँटकर बोला, “मैं इस जंगल का राजा हूँ।

मैं नहीं चाहता कि तुम लोग मेरे आस-पास रहो । मेरा आदेश है कि तुम लोग अभी अपने रहने के लिए कोई दूसरी जगह तलाश लो। अन्यथा, सब मरने के लिए तैयार हो जाओ! “

चींटियों में काफी एकता थी। वे कोबरा से बिलकुल भी नही डरीं। देखते ही देखते हजारों चींटियाँ बाँबी से बाहर निकल आईं।

सबने मिलकर कोबरे पर हमला बोल दिया। उसके पूरे शरीर पर चींटियाँ रेंग- रेंगकर काटने लगीं! दुष्ट कोबरा दर्द के मारे चिल्लाते हुए वहाँ से भाग गया।
Dec 04, 2020, 09:37 AM #19
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एक कानी हिरनी समुद्र तट के पास घास चर रही थी। उसे हमेशा सतर्क रहना पड़ता था क्योंकि शिकारी कभी भी उस पर हमला कर सकते थे।

वह बार-बार आसपास के मैदान पर नजर डाल लेती थी। उसका मानना था कि शिकारी आएँगे तो इसी रास्ते से आएँगे।

वह समुद्र की ओर कभी नहीं देखती थी क्योंकि उसे लगता था कि समुद्र की ओर से तो शिकारी आएँगे नहीं।

एक दिन, कुछ लोग एक नाव पर सवार होकर आए। हिरनी को चरते देखकर, उन्होंने उस पर तीर चला दिया। देखते ही देखते हिरनी जमीन पर गिर पड़ी।

अंतिम साँस लेते हुए हिरनी स्वयं से बोली, “भाग्य का खेल कितना निराला है! मैं सोचती थी कि खतरा जमीन की ओर से आएगा, लेकिन मेरे दुश्मन तो समुद्र की ओर से आ गए।”

खतरे प्राय: उस ओर से आते हैं, जहाँ से उनके आने की आशंका कम होती है।
Dec 04, 2020, 08:00 PM #20
S
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i like to read such long stories

thanks for share
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