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शायराना ऐ महफ़िल

Feb 24, 2021, 11:15 AM #1
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HELLO FRIENDS.....HOPE U WILL LOVE THIS SHAYARI AND OTHER COLLECTIONS....IF YOU LIKE PLZ HIT THANKS...AND MAKE OUR GROUP GROW
Thanked by: Mr.Love, Serecomputing, pHp
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Feb 24, 2021, 11:16 AM #2
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All the best to your creative thread:clap2:
Thanked by: pratapa007
Feb 24, 2021, 11:17 AM #3
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आँख में जितने भी आँसू थे ठिकाने लग गए ...
आते-आते इक तबस्सुम तक ज़माने लग गए ....

"आपसे इक बात कहनी है," बस इतनी बात थी...
मुझको इतनी बात कहने में ज़माने लग गए ....

तेरी पलकों के घने सायों का मौसम ख़ूब है....
धूप में निकला तो सर पे शामियाने लग गए....!!
Feb 24, 2021, 11:18 AM #4
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तुमने कभी मेरा होना नहीं चाहा
इस बात पर मैंने रोना नहीं चाहा

गठरी में रख ख्वाहिश चुप से बांध दी
फिर न पाना चाहा,न खोना चाहा
Feb 24, 2021, 11:22 AM #5
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उठ-उठ कर किसी का इंतजार कर के देखना
कभी तुम भी किसी से प्यार कर के देखना

कैसे टूटते हैं मोहब्बतों के रिश्ते
गलतियां दो-चार कर के देखना

जिंदगी का मतलब समझना हो तो
बारिश में कच्ची दीवार खड़ी कर के देखना

नफरत हो जाएगी तुमको दुनिया से
मोहब्बत किसी से बेशुमार कर के देखना
Feb 24, 2021, 11:29 AM #6
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अल्फाज नही लिखते बल्कि उसमे दर्द पिरोते हैं........

वो शायर ही ही होते हैं जो स्याही से रोते हैं...
Feb 24, 2021, 11:45 AM #7
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मौत के पास भी जाकर देखा है,
मैने भी दिल लगा कर देखा है!

चाँद को लोग दुर से देखते है,
मैने चाँद को पास बुला कर देखा है!

इश्क की किमत पुँछ लो मुझसे,
मैने घर तक लुटा कर देखा है!

प्यार तो भीख मेँ भी मिल जाता है,
मैने तो दामन को भी फैला कर देखा है!

एक शंक्स है जो भुलता नही मुझसे...
मैने सारी दुनियाँ को भुला कर देखा है...!
Feb 24, 2021, 06:11 PM #8
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मेरे मरने के बाद उफ क्या नज़ारे रहे होंगे

कुछ जबरदस्त तो कुछ जबरदस्ती रो रहे होंगे
Feb 24, 2021, 06:12 PM #9
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अकेले चलने का मतलब यह नहीं है कि आप गलत हैं,

हो सकता है कि कल दुनिया आपके द्वारा चुने गए रास्ते पर चलना शुरू कर दे ...
Feb 25, 2021, 07:11 PM #10
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क्या बात है बड़े चुपचाप बैठें हो।

कोई बात दिल पे लगी है,या दिल कही लगा बैठे हो ।
Feb 25, 2021, 07:16 PM #11
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मुहब्बत का तरीका सब से जुदा रखा है,

जिक्र हर बात में तेरा मगर नाम छुपा रखा है..
Feb 25, 2021, 07:17 PM #12
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वो मुझे इस तरह पसंद है,

जिस तरह बेईमान को रिश्वत..
Feb 25, 2021, 07:19 PM #13
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लफ़्ज़ों का वजन उनसे पूछिये

जिन्होंने

लबों पे खामोशी उठा रखी हैं
Feb 27, 2021, 10:46 AM #14
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कहीं कोयला तो कहीं खदान बिक रहा है.
गोल गुम्बद में हिंदुस्तान बिक रहा है..

यूँ तो कागज गल जाता है पानी की एक बूँद से.
चंद कागज़ के नोटों में मगर ईमान बिक रहा है..

गुलामी का दौर चला गया कैसे कहें जनाब.
कहीं इंसानियत तो कहीं इंसान बिक रहा है..

आज की नयी नस्लें होश में रहती कब हैं..
कैंटीन में चाय के साथ नशे का सामान बिक रहा है..

आधुनिकता और कितना नंगा करेगी हमको..
बेटे के फ्लैट के लिए बाप का मकान बिक रहा है
Mar 06, 2021, 09:31 PM #15
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फ़ितरत किसी की ना आजमाया कर ऐ ज़िन्दगी,

हर शख्स अपनी हद में बेहद लाजवाब होता है।
Jun 22, 2021, 08:49 PM #16
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Zeher bhai .... worthy
Jun 24, 2021, 08:20 PM #17
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wow nice collection...
Jun 27, 2021, 02:08 AM #18
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boht badiya bhai!
Jul 05, 2021, 09:53 AM #19
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"मत नफ़रत कर मुझसे मैं भी तेरी तरहा इंसान हूँ,

फ़र्क़ बस इतना है

तू महफ़िलों की रोनक है और मैं तेरे शहर में बदनाम हूँ......!!
Jul 06, 2021, 11:13 AM #20
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बहुत फ़सुर्दा लगते हैं मुझे, अब यार के क़िस्से
गुल-ओ-गुलज़ार की बातें, लब-ओ-रुख़सार के क़िस्से

यहाँ सब के मुक़द्दर में, फ़क़त ज़ख़्म-ए-जुदाई है
सभी झूठे फ़साने हैं, विसाल-ए-यार के क़िस्से

भला इश्क़-ओ-मुहब्बत से, किसी का पेट भरता है?
सुनो तुमको सुनाता हूँ, मैं कार-ओ-बार के क़िस्से

मेरे अहबाब कहते हैं, यही इक ऐब है मुझ में
सर-ए-दीवार लिखता हूँ, पस-ए-दीवार के क़िस्से

मैं अक्सर इसलिए लोगों से, जा कर नहीं मिलता
वोही बेकार की बातें, वोही बेकार के क़िस्से
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